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who is ajitesh argal ipl debut as umpire: अजितेश अर्गल ने 2008 अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल के ‘प्लेयर ऑफ द मैच’बनने के बाद एक अद्भुत सफर तय किया है. कभी विराट कोहली के साथ गेंदबाजी की शुरुआत करने वाले अर्गल, चोट और सीमित मौकों के कारण क्रिकेट से दूर होकर सरकारी नौकरी में चले गए थे. लेकिन खेल के प्रति अटूट जुनून उन्हें वापस मैदान पर ले आया. आईपीएल 2026 में बतौर अंपायर डेब्यू कर उन्होंने साबित कर दिया कि खेल की दुनिया में वापसी के रास्ते कभी बंद नहीं होते.
अजितेश अर्गल ने क्रिकेटर बनने के बाद इनकम टैक्स में नौकरी की और अब अंपायर बन चुके हैं.
नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट की गलियों में कहानियों की कोई कमी नहीं है. यहां हर खिलाड़ी का अपना एक संघर्ष है और अपनी एक अलग मंजिल. अक्सर हम उन खिलाड़ियों की चर्चा करते हैं जो अर्श तक पहुंचे और सुपरस्टार बने, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी भी होती हैं जो हमें सिखाती हैं कि अगर एक रास्ता बंद हो जाए, तो जुनून के दम पर नई राह कैसे बनाई जाती है. ऐसी ही एक प्रेरणादायक दास्तान है अजितेश अर्गल की.वही अजितेश जिन्होंने साल 2008 में मलेशिया मे विराट कोहली की कप्तानी में भारत को अंडर-19 वर्ल्ड कप जिताने में बड़ी भूमिका निभाई थी. आज आईपीएल 2026 में एक बिल्कुल नई भूमिका में नजर आ रहे हैं.
फ्लैशबैक में जाएं तो साल 2008 का अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी को याद होगा. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उस बारिश से प्रभावित मुकाबले में भारत ने एक छोटा सा लक्ष्य रखा था. मैच नाजुक मोड़ पर था, लेकिन बड़ौदा के युवा तेज गेंदबाज अजितेश अर्गल (Ajitesh Argal) ने अपनी सटीक लाइन और लेंथ से प्रोटियाज बल्लेबाजों की कमर तोड़ दी. उन्होंने अपने 5 ओवर के स्पेल में केवल 7 रन खर्च किए और 2 अहम विकेट झटके. उनकी इस किफायती और घातक गेंदबाजी के दम पर भारत ने विश्व विजेता का खिताब अपने नाम किया और अजितेश को उस ऐतिहासिक फाइनल में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया.
अजितेश अर्गल ने क्रिकेटर बनने के बाद इनकम टैक्स में नौकरी की और अब अंपायर बन चुके हैं.
उतार-चढ़ाव भरा सफर मैदान से दफ्तर तक
उस समय अजितेश के साथ मैदान पर विराट कोहली, रवींद्र जडेजा और मनीष पांडे जैसे खिलाड़ी थे. जो आगे चलकर वर्ल्ड क्रिकेट के चमकते सितारे बने. अजितेश के लिए भी राहें खुली थीं, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. विश्व कप की उस शानदार जीत के बाद अजितेश को आईपीएल के पहले ही सीजन में किंग्स इलेवन पंजाब (अब पंजाब किंग्स) ने अपनी टीम में शामिल किया. हालांकि, विडंबना देखिए कि जिस खिलाड़ी ने वर्ल्ड कप फाइनल में मैन ऑफ द मैच का खिताब जीता था, उसे आईपीएल के उस सीजन में एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला. घरेलू क्रिकेट में भी उनका सफर उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. उन्होंने बड़ौदा के लिए खेलते हुए लगभग एक दशक में केवल 10 फर्स्ट क्लास मैच, 3 लिस्ट ए और 6 टी20 मैच खेले. उनके आंकड़ों की बात करें तो प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने 24 विकेट अपने नाम किए, जबकि लिस्ट ए में 1 और टी20 प्रारूप में 4 विकेट हासिल किए.
जब क्रिकेट के मैदान पर सफलता के दरवाजे धीरे-धीरे बंद होने लगे, तो अजितेश ने अपने भविष्य को स्थिरता देने का फैसला किया. खेल कोटे के जरिए उन्होंने आयकर विभाग (Income Tax Department) में नौकरी हासिल की. कई सालों तक वह सरकारी फाइलें संभालते रहे और एक आम इंसान की तरह अपनी ड्यूटी निभाते रहे, लेकिन उनके भीतर का क्रिकेटर अभी भी सांस ले रहा था.
अंपायरिंग से नई पारी का आगाज
क्रिकेट से दूर रहकर भी अजितेश का मन मैदान पर ही लगा रहता था. साल 2023 में उन्होंने एक साहसी फैसला लिया और बीसीसीआई की अंपायरिंग परीक्षा में बैठने का निश्चय किया. उन्होंने न केवल यह कठिन परीक्षा पास की, बल्कि अंपायरिंग की बारीकियों को सीखने के लिए खुद को झोंक दिया. जल्द ही वह रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जैसे घरेलू टूर्नामेंटों में अंपायरिंग करते नजर आए. उनकी काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें कानपुर में भारत-ए बनाम ऑस्ट्रेलिया-ए के बीच खेली गई वनडे सीरीज और महिला प्रीमियर लीग (WPL 2026) में भी अंपायरिंग का मौका मिला. उनकी निष्पक्षता और खेल की समझ ने उन्हें बहुत कम समय में अंपायरों के एलीट पैनल की ओर धकेल दिया.
एक अधूरा सपना, एक नई पहचान
18 साल का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हुआ. जिस आईपीएल के मैदान पर अजितेश अर्गल कभी खिलाड़ी के तौर पर डेब्यू नहीं कर पाए थे, वहां उन्होंने अंपायर के रूप में अपना पहला कदम रखा. आईपीएल 2026 के 32वें मैच में, जो राजस्थान रॉयल्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच खेला गया, अजितेश अर्गल ने बतौर अंपायर अपना आईपीएल डेब्यू किया. लखनऊ के मैदान पर जब वह अंपायर की सफेद टोपी पहनकर उतरे, तो यह केवल एक मैच की शुरुआत नहीं थी, बल्कि एक खिलाड़ी की हार न मानने वाली जिजीविषा की जीत थी. जहां उनके पुराने साथी विराट कोहली आज भी अपनी बल्लेबाजी से रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं, वहीं अजितेश अर्गल अब उन्हीं मैचों में फैसले सुनाते नजर आ रहे हैं.
अजितेश अर्गल की यह कहानी हमें बताती है कि खेल में जीत और हार सिर्फ स्कोरबोर्ड तक सीमित नहीं होती. कभी-कभी अपनी परिस्थितियों से लड़कर एक नई पहचान बनाना ही सबसे बड़ी जीत होती है. आज अजितेश भले ही विकेट न ले रहे हों, लेकिन मैदान पर उनकी मौजूदगी हर उस खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है जिसका करियर वक्त से पहले थम गया था.
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें


