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LPG Crisis and Bengal Chunav: देश में उपजे एलपीजी संकट ने प्रवासी मजदूरों की कमर तोड़ दी है. सूरत, मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में गैस की किल्लत और बढ़ती महंगाई से परेशान होकर बड़ी संख्या में मजदूर अपने घर बंगाल और बिहार लौट रहे हैं. रोटी की जद्दोजहद में घर छोड़ने वाले ये मजदूर क्या बंगाल विधानसभा 2026 के समीकरणों के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं? क्या इनकी घर वापसी किसी पार्टी को सत्ता के शिखर पर बैठाएगी या किसी का खेल बिगाड़ेगी?
बंगाल चुनाव 2026 में क्या एलपीजी बड़ा मुद्दा बनेगा?
कोलकाता. बंगाल चुनाव 2026 में क्या एलपीजी बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है? ईरान-इजरायल युद्ध और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद होने से दुनिया के कई देशों में गैस संकट अलग-अलग तरह की मुसीबत लेकर आया है. भारत भी इससे अछुता नहीं है. भारत में भी बीते कुछ दिनों से गैस सिलेंडर की किल्लत से मध्यम वर्गीय खासकर मजदूर तबका काफी परेशान हैं. बीते दिनों सोशल मीडिया पर गुजरात से एक वीडियो काफी वायरल हुआ, जिसमें यूपी, बिहार और बंगाल के मजदूर एलपीजी किल्लत की वजह से घर लौट रहे थे. गुजरात के सूरत के उधना रेलवे स्टेशन का यह वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया. सैकड़ों मजदूर बैग-बिस्तर समेटे प्लेटफॉर्म पर भीड़ लगाए खड़े थे. एक युवक भावुक होकर कह रहा था, ‘अब नहीं आऊंगा दोस्त… अब नहीं आऊंगा’. ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हुई, कीमतें आसमान छू रही हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जो मजदूर दूसरे राज्यों से बंगाल लौट रहे हैं, क्या वह बंगाल चुनाव में अहम रोल निभाएंगे? बीजेपी और टीएमसी की हार-जीत में इन मजदूरों का रोल क्या अहम होगा?
आधिकारिक आंकड़े अभी सटीक नहीं हैं, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट्स और ट्रेड यूनियनों के अनुमान बताते हैं कि लाखों बंगाली मजदूर इस बार पहले से घर लौटे हैं. कर्नाटक मंगलुरु-उडुपी के निर्माण क्षेत्र में वेस्ट बंगाल के मजदूरों का आधा वर्कफोर्स ही लौट चुका है. माना जा रहा है कि एलपीजी किल्लत और चुनाव दोनों वजहें हैं. मुंबई से हावड़ा जाने वाली ट्रेनें भी भरभर कर आ रही हैं. रिपोर्ट्स कहती हैं कि लाखों युवा मजदूर कंस्ट्रक्शन, डोमेस्टिक हेल्पर्स दिल्ली, गुजरात, तमिलनाडु, केरल से बंगाल अपने घर पहुंच रहे हैं.
कितने मजदूर दूसरे राज्यों से बंगाल लौटे हैं?
गुजरात के सूरत से कुल 5-6 लाख मजदूरों का पलायन हुआ, जिसमें बंगाल, बिहार, ओडिशा के बड़े मजदूर शामिल हैं. ये मजदूर ज्यादातर ग्रामीण बंगाल मालदा, मुर्शिदाबाद, बर्धमान, उत्तर बंगाल के इलाके से हैं.ज्यादातर मजदूर एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम बहुल समुदायों से हैं. ये मजदूर कई सालों से बाहर कमाते थे, अब घर लौटकर वोट डालने जा रहे हैं.


